Skip to main content

विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय

डीएमईओ के बारे में

विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) की स्थापना सितम्बर 2015 में, पूर्ववर्ती कार्यक्रम मूल्यांकन कार्यालय (पीईओ) और स्वतंत्र मूल्यांकन कार्यालय (आईईओ) का विलयन कर की गई थी। यह नीति आयोग का एक संबद्ध कार्यालय है जिसका उद्देश्य संगठन के अनुवीक्षण और मूल्यांकन (एम एंड ई) अधिदेश को पूरा करना और भारत में अनुवीक्षण और मूल्यांकन पारितंत्र का निर्माण करना है।

नीति आयोग के गठन संबंधी मंत्रिमंडल टिप्पणी के अनुसार, इस संगठन को अनुवीक्षण और मूल्यांकन प्रकार्यों के विकास के साथ निम्नांकित कार्य सौंपे गए हैं: (i)कार्यनीतिक और दीर्घकालिक नीति और कार्यक्रम फ्रेमवर्क तथा पहलों की प्रगति और दक्षता का अनुवीक्षण करना ताकि नवप्रवर्तनकारी सुधार हो सकें और आवश्यक मध्यावधिक सुधारोपाय किए जा सकें; तथा (ii) कार्यक्रमों और पहलों के कार्यान्वयन का सक्रिय अनुवीक्षण और मूल्यांकन करना तथा यथावश्यक संसाधनों की पहचान करना ताकि सेवा उपलब्धता की सफलता संभावना और दायरे को सशक्त किया जा सके।

डीएमईओ का विज़न सरकार के संधारणीय परिणामों और प्रभावों को बेहतर बनाने का है। इसका लक्ष्य सरकारी कार्यक्रमों के उच्चस्तरीय अनुवीक्षण और मूल्यांकन को संभव बनाना है ताकि सेवा प्रदायगी की प्रभावकारिता, दक्षता, साम्यता और संधारणीयता, परिणाम और प्रभावों में वृद्धि हो सके।

डीएमईओ के उद्देश्य हैं:

1.     सरकार में सभी स्तरों पर डेटा-आधारित नीति निर्माण में सक्षम बनाना, नियमित स्व-मूल्यांकन से गहरी सीख लेने की संस्कृति विकसित करना;

2.     निष्पादन मीट्रिक और व्यापक कार्यक्रम मूल्यांकनों पर पैनी नज़र बनाए रखने हेतु संस्थागत व्यवस्था करना;

3.     सघन परिणाम अनुवीक्षण और मूल्यांकन को व्यवस्थित करने हेतु पूरे पारितंत्र को सुदृढ़ करना;

4.     सरकारी कार्यक्रमों के वास्तविक समय अनुवीक्षण हेतु अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और डेटा विश्लेषण साधनों के उपयोग का प्रारम्भ और विस्तार;

5.     सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और दक्षता में वृद्धि हेतु डेटा और साधन उपलब्ध कराना;

6.     प्रक्रिया संबंधी आवश्यक सुधारों के लिए कमियों और बाधाओं की पहचान करना।

नीति आयोग के एक अंग के रुप में, डीएमईओ के पास केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को सलाह देने की शक्तियां हैं और यह सरकार के उन चुनिंदा संस्थानों में से है जो अंतर-मंत्रालयी दृष्टिकोण रख सकता है। सहयोगपूर्ण और प्रतिस्पर्धी संघवाद के नीति आयोग के अधिदेश के अंतर्गत इसके अधिदेश में राज्यों को तकनीकी सलाह देना भी शामिल है।डीएमईओ संबंधित मुख्य नीति निर्माताओं से रिपोर्टें और समीक्षाएं सीधे ही साझा करने में भी सक्षम है ताकि कार्रवाई शुरु की जा सके। इस सांस्थानिक स्थिति के कारण इस संगठन को संयोजन शक्ति भी प्राप्त है ताकि देश में अनुवीक्षण एवं मूल्यांकन से संबंधित प्रगति के लिए एक मंच तैयार हो सके।

 

हमारा कार्य

2015 से डीएमईओ ने मुख्यतया परिणाम अनुवीक्षण के लिए अंत: - सरकारी पहलों पर कार्य किया है जिनमें प्रधान मंत्री द्वारा क्षेत्रकीय समीक्षाएं तथा भारत सरकार के 67 मंत्रालयों और विभागों की 591 स्कीमों को शामिल करते हुए उत्पादन-परिणाम अनुवीक्षण फ्रेमवर्क शामिल है।

I.     अनुवीक्षण:

उत्पादन-परिणाम फ्रेमवर्क

2019-20 के लिए केन्द्रीय बजट के साथ संसद के समक्ष रखा गया उत्पादन-परिणाम फ्रेमवर्क परिणाम-आधारित अनुवीक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है। यह केन्द्रीय क्षेत्रक (सीएस) और केन्द्र-प्रायोजित स्कीमों (सीएसएस), जिनका परिव्यय केन्द्र सरकार के व्यय बजट का लगभग 40% है, के अनुवीक्षण के लिए संकेतकों का एक फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है। यह केवल वास्तविक और वित्तीय प्रगति के मापन से परिणामों पर आधारित अभिशासन मॉडल की दिशा में एक आमूल बदलाव है। इस फ्रेमवर्क को तैयार करने के लिए डीएमईओ 2017 से मंत्रालयों और विभागों के साथ कार्य कर रहा है।

उत्पादन-परिणाम फ्रेमवर्क 2019-20 स्कीमों के उद्देश्यों अथवा ‘परिणामों’ को हासिल करने के लिए परिमेय संकेतक उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में प्रगति पर सक्रियता से नज़र रखने से शासन के लिए दो महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं: (i) विकास के प्रभाव तथा (ii) भारत सरकार द्वारा व्यय किए गए प्रत्येक रुपए के लोक उत्तरदायित्व में सुधार। अत: उत्पादन-परिणाम फ्रेमवर्क 2019-20 भारत सरकार के विकास कार्यक्रमों के अधिक सशक्त पोर्टफोलियो की दिशा में प्रगति का आधार स्थापित करता है। यह कार्य-निष्पादन पर आधारित बजटीय आवंटनों को संभव बनाता है और इसका उपयोग मौजूदा स्कीमों/कार्यक्रमों के बीच बजटीय और प्रशासनिक अभिसरण को प्रेरित करने के लिए भी किया जा सकता है।

संबंधित मंत्रालयों और कार्यान्वयनकर्ताओं के सहयोग से इस फ्रेमवर्क पर आधारित एक सुदृढ़ अनुवीक्षण तंत्र भारत सरकार की सभी सीएस/सीएसएस स्कीमों के शासन और कार्यान्वयन में आमूल परिवर्तन ला सकता है।

2019-20 के लिए 500 करोड़ रु. से अधिक आवंटन वाली सभी स्कीमों के लिए यह दस्तावेज यहां देखा जा सकता है:

https://www.indiabudget.gov.in/outcomebudget.php

शेष स्कीमों के लिए दस्तावेज यहां देखे जा सकते हैं:

https://www.niti.gov.in/documents/reports

क्षेत्रक संबंधी समीक्षाएं

 

डीएमईओ 13 अवसंरचना क्षेत्रकों और 4 सामाजिक क्षेत्रकों के संबंध में देश में कुछेक सर्वोच्च निर्णयकर्ताओं के लिए अनुवीक्षण समीक्षाएं तैयार करता है। ये समीक्षाएं नौकरशाही खण्डों को पार कर क्षेत्रकों के कार्य-निष्पादन का एक प्रति-मंत्रालयी मत प्रस्तुत करती हैं। अवरोधों को निर्दिष्ट करके तथा अंत:क्षेपों को सुझाने के द्वारा, समग्र विकास परिणामों को सुधारते हुए, सरकार के उच्चतम स्तरों से अक्सर तत्काल कार्रवाई आरंभ की जाती है। इस प्रयास में, डीएमईओ ने निगरानी और विश्लेषण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक इटरैक्टिव डैशबोर्ड विकसित किया है। यह डैशबोर्ड मंत्रालयों या विभागों के लिए उपलब्ध है और उन्हें पिछली समीक्षा के कार्यों पर की गई कार्रवाई तथा प्रगति डाटा अपलोड करने में समर्थ बनाता है। प्रत्येक समीक्षा के कार्यवृत्त से कार्रवाई आरंभ करने में सहायता मिलती है, जबकि नियमित की गई कार्रवाई रिपोर्टें जो आवधिक रूप से उच्च-स्तर के निर्णय लेने वालों को भेजी जाती हैं, अनुवर्त्ती कार्रवाई में मदद करती हैं।

 

अन्य क्रिया–कलाप और साधन

डीएमईओ डाटा विश्लेषण करता है और अनुवीक्षित डाटा के आधार पर विभिन्न हितधारकों को सिफारिशें उपलब्ध कराता है। यह अनुवीक्षित किए जाने वाले महत्वपूर्ण परिणामों और परिणाम संकेतकों को रेखांकित करते हुए योजना डिज़ाइन और मूल्यांकन चरण पर मंत्रालयों और विभागों को टिप्पणियां प्रदान करता है। यह मंत्रालयों आदि के परिपक्वता आकलन की निगरानी करते हुए राष्ट्र-व्यापी निगरानी और मूल्यांकन नीति सहित देश में मानक निर्धारित करने की अपनी क्षमता को भी सुदृढ़ कर रहा है।

II.     मूल्यांकन

1.    केन्द्र द्वारा प्रायेाजित योजनाओं का मूल्यांकन

जन संसाधनों का कुशल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार ने 15वें वित्त आयोग के आरंभ से पूर्व योजनाओं के ताज़ा मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत होने से पूर्व केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) और केन्द्रीय क्षेत्रक (सीएस) योजनाओं के मूल्यांकन को अनिवार्य बना दिया है। सरकार ने समयबद्ध रूप में सभी सीएसएस के एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष मूल्यांकन को आयोजित करने का दायित्व डीएमईओ, नीति आयोग को सौंपा है ताकि योजनाओं के युक्तिकरण को निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन के निष्कर्षों को उपयुक्त प्राधिकरणों को उपलब्ध कराया जा सके।

28 अम्ब्रेला सीएसएस के तहत सीएसएस का मूल्यांकन 10 क्षेत्रक मूल्यांकन अध्ययनों के माध्यम से पूरा किया जाएगा जिसे खुली निविदा प्रक्रिया के माध्यम से बाह्य एजेंसियों द्वारा आयोजित किया जाता है और जो वर्तमान में जारी है। दस पैकेज इस प्रकार है: (1) कृषि, पशु-पालन और मत्स्य पालन (2) महिला एवं बाल (3) मानव संसाधन विकास (4) शहरी परिवर्तन (5) ग्रामीण विकास (6) पेयजल और स्वच्छता (7) स्वास्थ्य (8) नौकरियां और कौशल (9) जल संसाधन, पर्यावरण एवं वन (10) सामाजिक समावेशन, कानून और व्यवस्था तथा न्याय प्रदान करना।  

 

2.    अन्य मूल्यांकन

विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय भारत सरकार के कार्यान्वयन मंत्रालयों/विभागों के अनुरोध पर या स्वप्रेरणा से चयनित कार्यक्रमों का मूल्यांकन करता है। कार्यक्रमों के मूल्यांकन के उद्देश्य में विकास कार्यक्रमों के दीर्घकालिक प्रभावों का वस्तुपरक मूल्यांकन, कार्यक्रमों के निष्पादन के विभिन्न चरणों में सफलताओं और विफलताओं के क्षेत्रों और कारणों की पहचान; मध्यावधि सुधारों का सुझाव देना और भविष्य के लिए पाठ का प्रसार करना शामिल हैं। मूल्यांकन के लिए मानकों में प्रासंगिकता, प्रभावशीलता, दक्षता, इक्विटी और सेवा प्रदायगी की संधारणीयता, परिणाम और प्रभाव शामिल हैं।   

विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय उच्च प्रभाव वाले फ्लैगशिप मूल्यांकन भी करता है, जिसका उद्देश्य निर्णयकर्ताओं को समय पर कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि प्रदान करना, भारत में अनुवीक्षण और मूल्यांकन पारिस्थितिकी तंत्र में मूल्यांकन क्षमता का निर्माण करना और कटिंग-एज मूल्यांकन साधनों, कार्य प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों का संचालन करना है।

विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के अनुरोध पर तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाती है जिसमें विचारार्थ विषयों को तैयार करना, खरीद प्रक्रिया को नेविगेट करना आदि शामिल हैं।

डीएमईओ बाह्य पारितंत्र में मौजूदा क्षमताओं का लाभ उठाने और उन्हें सक्रिय करने के लिए विभिन्न भागीदारों के साथ कार्य कर रहा है ताकि डीएमईओ द्वारा केवल अपने बल पर किए जा सकने वाले कार्यकलापों की तुलना में अधिक व्यापक कार्यकलापों को आरंभ किया जा सके। विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय का उद्देश्य बहु-हितधारकों की साझेदारी का पता लगाना है जिसमें फंडिंग साझेदार, तकनीकी साझेदार एवं शोधकर्ता, प्रौद्योगिकी एवं डाटा साझेदार, फील्ड साझेदार इत्यादि जैसे संगठन शामिल हैं। डीएमईओ, अनुवीक्षण और मूल्यांकन ज्ञान और कौशल के लिए एक वाहक के रूप में कार्य करेगा; भारत और विदेशों में अग्रणी संगठनों से सीखना और केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और अन्य बाहरी संगठनों के प्रति इसे सीखने में मदद करना, जिससे पूरे अनुवीक्षण और मूल्यांकन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बढ़ेगा।

कार्यालय सक्रिय रूप से नीति आयोग की पहलों में भाग लेता है और जब भी अनुरोध किया जाता है तो सहायता उपलब्ध कराता है।