
"मानव विकास: असमानता समाप्ति की ओर" नामक परियोजना नीति आयोग, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों द्वारा मानव विकास पर निरंतर सहयोग के पुरज़ोर समर्थन का जवाब है ताकि "विश्लेषण की बजाए कार्रवाई" पर ज़ोर दिया जा सके। परियोजना का जोर समावेशी विकास को बढ़ावा देने और निरन्तर असमानता तथा विसंगति के मुद्दों पर कार्रवाई उन्मुख गुणवत्ता अध्ययन का समर्थन करने पर तथा विभिन्न हितार्थियों के क्षमता विकास पर जोर देने पर है।
मानव विकास दृष्टिकोण 8वीं पंचवर्षीय योजना से ही भारतीय आयोजना की आधारशिला रहा है। इस अवधारणा को इस तरीके से अपनाया जाना इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि राज्य और जिला स्तर पर मानव विकास को मापने और एचडीआर तैयार करने के मामले में भारत ने वैश्विक मानदंड स्थापित कर दिया है।
पृष्ठभूमि:
"मानव विकास: असमानता समाप्ति की ओर" नामक परियोजना विशेष रूप से राज्य स्तर पर निरन्तर वंचन के मुद्दों से निपटने के लिए अभिनव नीतिगत विकल्प प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है। इस संदर्भ में असमानता और ख़ासकर लैंगिक तथा सामाजिक असमानता के मुद्दों पर पर विशेष जोर दिया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर पहल से राज्य स्तर पर कार्रवाई में मानव विकास के एजेंडे को व्यावहारिक रुप देने में सक्षमता आएगी।
एचडीबीआई परियोजना का दायरा और रणनीति:
एचडीबीआई परियोजना में 2012 से 2017 तक कुल 2.7 मिलियन अमरीकी डालर के बजट के साथ {लगभग 16.2 करोड़ रुपए (प्रति अमरीकी डॉलर 60 रुपए की दर से)} 15 राज्यों को कवर करने का प्रस्ताव है। राज्य स्तरीय पहलों में शामिल हैं: राज्य स्तरीय मानव विकास रिपोर्ट, जिला मानव विकास रिपोर्ट, क्षेत्रीय मानव विकास रिपोर्ट तैयार करना, अनुसंधान आधारित नीति को बढ़ावा, क्षमता विकास, सांख्यिकीय प्रणालियों का सशक्तिकरण और सामुदायिक अनुवीक्षण साधनों का उपयोग। राष्ट्रीय स्तरीय पहलों में शामिल हैं: मानव विकास नीति को बढ़ावा, क्षेत्रीय / विषयगत मानव विकास रिपोर्ट तैयार करना, क्षमता विकास, सांख्यिकीय प्रणाली का सुदृढीकरण, मानव विकास में सुधार के लिए बजट विश्लेषण और जिला मानव विकास रिपोर्ट की प्रस्तुति। एचडीबीआई परियोजना का उद्देश्य कई प्रकार के हितार्थियों के बीच भागीदारी को बढ़ावा देना है जिनमें सांसद, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज संगठन, विश्वविद्यालय, मीडिया आदि शामिल हैं।
प्रबंधन व्यवस्था
क. कार्यान्वयन व्यवस्थाएं
यह परियोजना नीति आयोग द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम(यूएनडीपी) के सहयोग से कार्यान्वित की जाती है। नीति आयोग द्वारा नामित राष्ट्रीय परियोजना निदेशक समग्र प्रबंधन के प्रति उत्तरदायी है और परियोजना के दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए उसे परियोजना प्रबंधक से सहयोग मिलता है।
यूएनडीपी के नियमों और विनियमों के अनुसार, नीति आयोग यूएनडीपी के साथ प्रति वर्ष एक बजटगत वार्षिक कार्य योजना पर हस्ताक्षर करता है और यूएनडीपी नियमों के अनुसार हस्ताक्षरित वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। सह-कार्यान्वयनकर्ता के रूप में, यूएनडीपी वार्षिक कार्य योजनाओं में कुछ निश्चित क्रियाकलाप करता है।
राष्ट्रीय संचालन समिति का गठन 12 जनवरी 2011 के कार्यालय आदेश के माध्यम से किया गया है ताकि परियोजना व्यय का दिशानिर्देशन और अनुवीक्षण किया जा सके तथा कार्यों और परिणामों की तुलना में व्यय की समीक्षा की जा सके; और वार्षिक तथा त्रैमासिक कार्य योजनाओं का अनुमोदन किया जा सके। इसी प्रकार, राज्यों से भी अपेक्षा है कि वे राज्य स्तर पर परियोजना कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु स्वयं की राज्य परियोजना संचालन समितियों का गठन करें।
ख. धनापूर्ति व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन:
परियोजना के तहत व्यय को दर्शाने वाली संयुक्त उपलब्धता रिपोर्टें यूएनडीपी और नीति आयोग द्वारा त्रैमासिक और वार्षिक रूप से हस्ताक्षरित होती हैं। अनुमोदित वार्षिक कार्य योजनाओं के अनुसार व्यय और अप्रयुक्त धनराशि की समीक्षा कैलेंडर वर्ष की अंतिम तिमाही के आरंभ में की जाती है और इसके अनुसार धनराशि का पुनरावंटन किया जाता है। राज्यों को वित्तीय प्रवाह और धन जारी किया जाना प्रतिपूर्ति के तौर-तरीक़ों पर होता है, जिसमें राज्य त्रैमासिक उपयोग प्रमाणपत्र (यूसी) जमा करते हैं और उसी के अनुसार धनराशि जारी की जाती है।





