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अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी

 

नीति आयोगविकास अनुसंधान परिषद (डीआरसी) की चौथी वार्ता

 

 

स्टेट काउंसिल, चीन लोक गणराज्य के डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर और राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (नीति आयोग), भारत गणराज्य ('नीति आयोग-डीआरसी वार्ता') के बीच चौथी वार्ता 1 नवंबर 2018 को मुंबई, भारत में आयोजित की गयी। चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व माननीय श्री ली वेई,अध्यक्ष- डीआरसी ने और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नीति आयोग के उपाध्यक्ष माननीय डॉ. राजीव कुमार ने किया।

 

भारत सरकार के नीति आयोग और विकास अनुसंधान केंद्र (डीआरसी) तथा स्टेट काउंसिल, चीन लोक गणराज्य के बीच समझौता ज्ञापन के तहत बातचीत हुई थी, जिसे मई, 2015 में भारत के माननीय प्रधान मंत्री की चीन यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित किया गया था।

 

इसमें चीन और भारत प्रशासन के 40 वरिष्ठ प्रतिनिधियों और स्थानीय सरकार, शिक्षाविदों और उद्यम प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में नीति आयोग, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य विभाग के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल थे।

 

इस वर्ष की वार्ता में, चीन और भारत में वैश्विक अर्थव्यवस्था, वैश्वीकरण और मैक्रो-आर्थिक नीतियों; नवप्रवर्तन, खुलापन और आर्थिक परिवर्तन; तथा चीन-भारत आर्थिक और व्यापार सहयोग: संभाव्यता और संभावनाओँ पर तीन सत्र आयोजित किए गए।

 

इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि नीति आयोग और डीआरसी, विश्व व्यापार संगठन के सुधारों और शहरीकरण के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करेंगे जिसे अगली वार्ता में प्रस्तुत किया जाएगा। अनुसंधान के लिए दोनों पक्षों द्वारा नामित टीमें अंतर-सत्रीय बैठकों के माध्यम से बातचीत करेंगी और 5वीं वार्ता में परिणाम प्रस्तुत करेंगी। नवंबर, 2019 में चीन के वुहान में 5 वीं डीआरसी-नीति आयोग वार्ता आयोजित की जाएगी।

 

 

वीं नीति आयोग-राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी), चीन कार्यनीतिक आर्थिक वार्ता (एसईडी)

 

5 वीं भारत-चीन कार्यनीतिक आर्थिक वार्ता (एसईडी) 14 अप्रैल, 2018 को बीजिंग, चीन में आयोजित की गयी थी। इसमें भारतीय पक्ष का नेतृत्व नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने किया और चीनी पक्ष का नेतृत्व ली फेंग, अध्यक्ष, राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने किया।

 

दोनों पक्षों ने वैश्विक आर्थिक रुझानों और दोनों देशों की व्यापक आर्थिक स्थिति पर गहराई से विचार-विमर्श किया। पाँच अंतर-मंत्रालयी कार्य समूहों, अर्थात् नीति समन्वय; अवसंरचना; उच्च प्रौद्योगिकी; संसाधन संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण; तथा ऊर्जा जो एसईडी के दायरे में मौजूद हैं में द्विपक्षीय व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया।

 

यह नोट किया गया था कि एसईडी ने अवसरों को हासिल करने, आपसी विश्वास बढ़ाने, आम सहमति का विस्तार करने और रणनीतिक समन्वय और सहयोग को मजबूत करने में दोनों देशों के लिए सकारात्मक भूमिका निभाई है।

 

वार्ता के दौरान एसईडी के पांच कार्यसमूहों द्वारा व्यावहारिकता के सिद्धांतों के अनुरूप और संधारणीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ठोस परिणाम, उपलब्धियां और प्रगति भी रखी गई थी।

 

एसईडी के लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिकारी और सरकार, उद्यमों और अनुसंधान संस्थानों के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि शामिल थे। वार्ता के परिणामस्वरूप, इस एसईडी की उपलब्धियों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने और बातचीत तथा संवाद बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों द्वारा फील्ड जांच और संबंधित बैठकें आयोजित करने पर सहमति हुई।

 

6ठी एसईडी भारत में 2019 में पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि पर आयोजित की जाएगी।

 

नीति आयोग और आर्थिक विकास मंत्रालय, रूसी संघ के बीच प्रथम भारत-रूस कार्यनीतिक आर्थिक वार्ता

 

सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास संबंधी तैयारी की रूपरेखा और कार्यनीतियों के कार्यान्वयन में सहयोग की संभाव्यता का पता लगाने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (नीति आयोग) ने रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय, रूस सरकार के साथ समझौता-ज्ञापन पर 05.10.2018 को हस्ताक्षर किए हैं।

 

इस समझौता-ज्ञापन में बनी सहमतियों के तहत 25-26 नवंबर, 2018 को सेंट पीटर्सबर्ग, रूस में पहली भारत-रूस कार्यनीतिक आर्थिक वार्ता (आईआरएसईडी) आयोजित की गई थी। रुस की ओर से आईआरएसईडी का नेतृत्व श्री मैक्सिम ओरेशकिन, मंत्री, एमईडी ने और भारतीय पक्ष का नेतृत्व नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने किया।

 

प्रथम आईआरएसईडी में सहयोग के पांच प्रमुख क्षेत्रों अर्थात्, परिवहन अवसंरचना और प्रौद्योगिकी विकास; कृषि और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र का विकास; लघु और मध्यम व्यापार सहायता; डिजिटल परिवर्तन और अग्रणी प्रौद्योगिकियों; और औद्योगिक सहयोग और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया गया। आईआरएसईडी का आशयित उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक और निवेश सहयोग में सुधार लाने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की रूपरेखाओं में संयुक्त परियोजनाओं को परिभाषित करने के लिए सबसे अधिक संभावनाओं से भरे क्षेत्रों की पहचान करना था।

 

आईआरएसईडी में दोनों पक्षों से संघीय और क्षेत्र के अधिकारियों, शैक्षणिक और व्यावसायिक समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वार्ता में, दोनों पक्षों ने आईआरएसईडी तंत्र के माध्यम से साझा हितों को पहचानने और समय-सीमा में और परस्पर लाभकारी तरीके से लंबित मुद्दों पर गहन सहयोग करने और समाधान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

 

वार्ता के परिणामस्वरूप, नीति आयोग में भारत-रूस द्विपक्षीय परिषद की स्थापना की गई है जिसका उद्देश आईआरएसईडी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाना है।

द्वितीय भारत-रूस कार्यनीतिक आर्थिक वार्ता जुलाई के अंत में/अगस्त 2019 की शुरुआत में भारत में निर्धारित है।

 

नीति आयोग- राष्ट्रीय योजना आयोग, नेपाल वार्ता

 

उपाध्यक्ष, नीति आयोग ने 20 सितंबर, 2018 को काठमांडू का दौरा किया और “भारत, नेपाल और नेबरहुड” पर एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्याख्यान दिया। उपाध्यक्ष ने नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. पुष्प राज कदेल से भी मुलाकात की। नीति आयोग और नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के बीच वार्षिक नीतिगत संवाद स्थापित करने के मामले पर, जिस पर अगस्त 2017 में नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान सहमति व्यक्त की गई थी, पर भी नेपाल के योजना आयोग के उपाध्यक्ष के साथ चर्चा की गई। नेपाल के योजना आयोग के उपाध्यक्ष की अक्टूबर, 2018 में भारत यात्रा के दौरान भी इस पर उनसे विचार-विमर्श किया गया था और यह सहमति बनी थी कि भारत के विदेश मंत्रालय और नेपाल के विदेश मंत्रालय के परामर्श से बातचीत शुरू करने की एक निश्चित व्यवस्था तय की जाए।

 

संधारणीय विकास संबंधी पांचवा एशिया-प्रशांत मंच (एपीएफएसडी)

 

सितंबर 2015 में, भारत सहित 193 देशों ने संयुक्त राष्ट्र के संकल्प ट्रांसफार्मिंग आवर वर्ल्डःद 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ में यथावर्णित संधारणीय विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। 2030 एजेंडा की अंतर्राष्ट्रीय अनुवर्तन और समीक्षा के लिए केंद्रीय मंच उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (एचएलपीएफ) है जिसकी संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के तत्वावधान में वार्षिक बैठक होती है।

एचएलपीएफ के लिए क्षेत्रीय तैयारी के तौर पर, संधारणीय विकास संबंधी एशिया-प्रशांत मंच को 5वीं बैठक बैंकॉक में 28 मार्च 2018 से 30 मार्च 2018 तक हुई जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने की। इसमें सदस्य राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र निकायों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और अन्य हितार्थियों ने "टिकाऊ और लचीला समाजों के प्रति परिवर्तन" विषय पर विचार-विमर्श किया। मंच ने एचएलपीएफ लक्ष्य- 6 (स्वच्छ पानी और स्वच्छता), 7 (सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा), 11 (संधारणीय शहर और समुदाय), 12 (उत्तरदायी उपभोग और उत्पादन), 15 (पृथ्वी पर जीवन) और 17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारी) के साथ ही सभी लक्ष्यों के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। मंच ने उन देशों के बीच अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया जो पहले ही एचएलपीएफ में अपनी स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा प्रस्तुत कर चुके हैं और जिन्हें जुलाई के महीने में न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले एचएलपीएफ 2018 में प्रस्तुति देनी थी। मंच ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र में संधारणीय विकास के लिए 2030 एजेंडा को लागू करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय रोडमैप के संबंध में हुई प्रगति का भी जायजा लिया। इस कार्यक्रम में लगभग 600 प्रतिभागी शामिल हुए।

 

संधारणीय विकास संबंधी दक्षिण एशिया मंच

 

नीति आयोग, एशिया और प्रशांत संबंधी संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूनेस्कैप) और आरआईएस ने 4-5 अक्टूबर 2018 को इंडिया हैबिटेट सेंटर में दक्षिण एशिया फोरम ऑन द सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स” का आयोजन किया ताकि 2030 एजेंडा के कार्यान्वयन के लिए चुनौतियों और अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके,, 2019 में एचएलपीएफ की समीक्षा के तहत लक्ष्यों संबंधी उप-क्षेत्रीय दृष्टिकोण और उत्तम कार्यशैलियों की चर्चा की जा सके तथा साझेदारी और कार्यान्वयन प्रयासों को मजबूत करने के तरीकों की पहचान की जा सके। दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों, प्रमुख थिंक टैंक और शिक्षाविदों के साथ-साथ एसडीजी के कार्यान्वयन का समर्थन करने वाले क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों ने मंच की बैठक में हिस्सा लिया। विचार-विमर्श के प्रमुख क्षेत्रों में, एसडीजी के कार्यान्वयन के लिए क्षेत्रीय / उप-क्षेत्रीय नीतिगत वातावरण में सुधार की संभावना और विकल्पों तथा मुख्य हितार्थियों का क्षमता विकास शामिल थे।

 

नीति आयोग और व्यापार, ऊर्जा और औद्योगिक कार्यनीति विभाग (बीईआईएस),ब्रिटेन के बीच आशय वक्तव्य(एसओआई)

 

एसओआई ने नीति आयोग और बीईआईएस के बीच एक साझेदारी की परिकल्पना की है जिसमें ब्रिटिश क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी क्लस्टर जिसमें मिडलैंड्स इंजन आर्थिक क्षेत्र, उत्तरी पावरहाउस आर्थिक क्षेत्र, अन्य महापौर संयुक्त प्राधिकरण और स्थानीय एंटरप्राइज़ भागीदारी और बीईआईएस तथा नीति आयोग द्वारा यथास्वीकृत ब्रिटिश क्षेत्र शामिल हैं, और इसे सदृश प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं वाले भारतीय क्षेत्रीय अधिकारियों (सामूहिक रूप से "क्लस्टर सदस्य" के रूप में संदर्भित) को सर्वोत्तम कार्यशैली सहित द्विपक्षीय चर्चाओं और आदान-प्रदान; नीति विकास और सेवा उपलब्धता संबंधी व्यावहारिक अनुभवों पर द्विपक्षीय चर्चा और साझाकरण; प्रौद्योगिकी और नवाचार चुनौतियों पर सहयोग; और भारत-ब्रिटेन प्रौद्योगिकी के संयुक्त प्रदर्शन में व्यावहारिक सहयोग मिल सकता है।

 

इस साझेदारी से भावी गतिशीलता और इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और डेटा (आकांक्षी स्वास्थ्य ज़िलों में और समकक्षी ब्रिटिश पहलों में डिजिटल पायलटों के समर्थन में स्वास्थ्य सेवा में अऩुप्रयुक्त सहित), फिनटेक, डिजिटल और उन्नत विनिर्माण (एक संभावित भारत-ब्रिटिश भावी विनिर्माण केंद्र पर सहयोग सहित); उद्यमिता; और एआई को आगे बढ़ाने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए बड़े डेटा और विश्लेषकीय क्षमता की तुलना में भावी प्रौद्योगिकीय सहयोग पर गहन और अधिक नियमित रूप से जुड़ाव की संभावनाओं को तलाशने में आसानी होगी। दोनों प्रतिभागियों की व्यवस्था के साथ अन्य क्षेत्रों को जोड़ा जा सकता है।

 

 

भारत और रूस के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर

 

नीति आयोग ने 05.10.2018 को रूस सरकार के आर्थिक विकास मंत्रालय, रूस सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन से साझेदारियों को सक्षम बनाने, आर्थिक नीति के विकास के क्षेत्र में अनुभव साझा करने, रूसी संघ और भारत गणराज्य के राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के बीच नियमित संवाद और सहयोग के लिए एक मंच उपलब्ध होगा।

 

दोनों पक्षों के बीच सहयोग में शामिल होंगे: संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन और निष्पादन, सूचना और अनुसंधान कार्यों का आदान-प्रदान, विशेषज्ञों का दौरा, सेमिनारों का संगठन, सम्मेलन और सहमत एजेंडे पर अन्य बैठकें; और दोनों पक्षों की आपसी सहमति के अनुसार सहयोग के अन्य रूप। एमओयू के तहत पहली वार्ता सेंट पीटरसबर्ग में नवंबर, 2018 में आयोजित की गई थी।