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साझेदारी के परिणाम

i) क्षमता विकास

  •  निर्दिष्ट विषय पर एक विशेषज्ञ परामर्शी समूह का संघटन (नीति आयोग से प्रतिनिधित्व सहित)और प्रभावी कामकाज ।
  • यदि विशेषज्ञ समूह द्वारा यह तय किया जाए तो इसे विशिष्ट विषयों पर तकनीकी परामर्शी समूहों द्वारा समर्थित किया जा सकता है।
  • क्षेत्रों / राज्यों से विशेषज्ञों, व्यवसायियों राष्ट्रीय, के कार्यात्मक ई-संसाधन नेटवर्क जिसे नीति वेब साइट पर भी पोस्ट किया जा सकता है।
  • नवीनतम शोध अध्ययन और सर्वोत्तम प्रथाओं के मामलों के अध्ययन सहित विषयों पर ई-संसाधन सूची
     

ii) 15 साल की परिकल्पना, 7 साल की कार्यनीति और 3 साल की कार्य योजना के लिए इनपुट

  •  थीम पॉलिसी पेपर जो परिकल्पना, स्थिति विश्लेषण, चुनौतियों और अवसरों, उभरते मुद्दों, कार्यनीतियों और निगरानी परिणामों को उजागर करता है। यह 7 साल की कार्यनीति और 3 साल की कार्य योजना में शामिल होगा।
  • राष्ट्रीय और बाद में विश्व स्तर पर जुड़ी हुई सर्वोत्तम प्रथाओं का संश्लेषण।
  • विशिष्ट विषयों से संबंधित मुद्दों पर नई जानकारियां साझा करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन। इस विषय पर आवधिक सूचना-पत्र भी प्रकाशित किया जा सकता है।
     

iii) मेंटरिंग और आउटरीच

  • अन्य क्षेत्रों में इस विषय पर 10 या अधिक निर्दिष्ट संस्थानों का प्रबंधन।
  • राष्ट्रीय विकास कार्यसूची का समावेश / एकीकरण और लोक नीति पर, जहां लागू हो, संगत पाठ्यक्रम / सत्रों में नीति आयोग की भूमिका - ।
     

iv) सामाजिक गतिशीलता

प्रत्येक भागीदार संस्थान द्वारा किसी भी चयनित राष्ट्रीय प्राथमिकता पर लोक अभियान संचालित किया जाएगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों, जुड़े संस्थानों और नागरिक समाज को संघटित किया जा सके। इस प्राथमिकता की पहचान संस्था द्वारा अपने रूचि के क्षेत्र- जैसे स्वच्छ भारत, हरित ऊर्जा, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, आदि से की जाएगी।